Tuesday, 18 February 2020
आग़
Saturday, 30 November 2019
justice for dr priyanka reddy
Wednesday, 27 November 2019
for my love's birthday
Wednesday, 2 October 2019
इंतजार
हां, जब रात आती है, तो तुम्हारा इंतजार करती हूं,
टूट जाने की हद तक एक बार फिर तुमसे प्यार करती हूं,
रात अक्सर इतनी उलझन और तन्हाई में गु़ज़रती है,
कि ओढ़ तेरी चादर अक्सर तारे गिना करती हूं।
हां, उन बादलों के पीछे छुपी पतंग को मैं अब भी ढूंढा करती हूं,
मांझा फिर से हाथ में आ जाए, बस यही सोचा करती हूं,
पर वो पतंग तो कट चुकी है, ना जाने कब की,
कि डोर भी कोई ले जाए, अब तो इससे उलझा करती हूं।
फासले मिटाने को जब भी दो कदम आगे मैं चलती हूं,
सब पीछे ही छूट जाता है, लोगों को खोने से डरती हूं,
आशियाने बना रखे हैं उन्होंने पुरानी बस्तियों में,
कि नए मकान ढह जाते हैं, अक्सर उनसे सुना करती हूं।
और फ़िर से जब रात आती है, तो तुम्हारा इंतजार करती हूं,
टूट जाने की हद तक एक बार फिर तुमसे प्यार करती हूं।।
Thursday, 19 September 2019
बेनाम
कि इस मोहब्बत को अब बेनाम ही रहने दो,
वो जो सुबह का साथ था ,उसे शाम ही रहने दो।
इज़हार, इंकार, इक़रार और फिर शायरी में शुमार ही रहने दो।।
दर्ज किया था तुमको जिन पन्नों पर,
उस किताब को अब दरकिनार ही रहने दो। तू है तो जैसे दरक्षा है हयात,
इसको तो बस गुलज़ार ही रहने दो।
ये जो चांद की चांदनी के मुरीद है ना लोग,
इस रोशनी के पीछे सूरज को गुमनाम ही रहने दो।
कि इस मोहब्बत को अब बेनाम ही रहने दो।।
Saturday, 31 August 2019
अमृता प्रीतम
दुनिया ने डोर से बांधकर उसे ' प्रीतम ' कर दिया,
एक अधूरा अफसाना जो उस साहिर का था,
लफ़्ज़ों में क़ैद, पन्नों में दर्ज और आंखों से बयान कर दिया।
कि इकतरफा मोहब्बत भी कम कहर नहीं ढ़ाती,
कुछ यूं ही अपना बीता हुआ कल उसने इमरोज़ कर दिया।